NEWS | BY: POLITICS FEVER DESK | UPDATED: AUGUST 09, 2026
भारत में डिजिटल स्पेस और यूजर्स की सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार ने सोशल मीडिया दिग्गजों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरकार ने साफ़ किया है कि अब सिर्फ़ कंटेंट हटाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्लेटफ़ॉर्म्स के एल्गोरिदम की भी जवाबदेही तय होगी।
Highlights
- सख्त हिदायत: सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) को भारत के आईटी नियमों और कानूनों का शत-प्रतिशत पालन करने का निर्देश दिया गया है।
- एल्गोरिदम की जांच: फेक न्यूज़, हेट स्पीच और पक्षपातपूर्ण कंटेंट को बढ़ावा देने वाले एल्गोरिदम पर सरकार नजर रखेगी।
- कानूनी सुरक्षा पर खतरा: नियमों की अनदेखी करने पर कंपनियों को मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ कानूनी संरक्षण छीना जा सकता है।
आईटी नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की मूल कंपनी मेटा (Meta) को स्पष्ट और कड़ा संदेश जारी किया है। सरकार का कहना है कि भारत में कारोबार करने के लिए टेक कंपनियों को देश की कानूनी व्यवस्था और आईटी नियमों का पूरी तरह सम्मान करना अनिवार्य है।
हाल के दिनों में डिजिटल स्पेस में बढ़ रही फेक न्यूज़ और नफरती सामग्री को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। अधिकारियों का मानना है कि केवल शिकायतों के बाद कंटेंट हटा देना ही समाधान नहीं है, बल्कि समस्या की जड़ तक पहुँचना ज़रूरी है।
पहली बार जांच के घेरे में आएगा एल्गोरिदम
इस नए रुख की सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार अब कंपनियों के एल्गोरिदम की भी जांच करेगी। एल्गोरिदम यह तय करता है कि किसी यूजर की स्क्रीन पर कौन सा कंटेंट सबसे पहले या सबसे ज्यादा दिखेगा।
सरकार इस बात की पड़ताल करेगी कि क्या ये एल्गोरिदम जानबूझकर नफरत फैलाने वाली भाषा (Hate Speech) या सनसनीखेज फेक न्यूज़ को ज्यादा रीच देते हैं। अगर एल्गोरिदम में कोई पक्षपात या गड़बड़ी पाई जाती है, तो कंपनी को इसके लिए सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा।
‘सेफ हार्बर’ प्रोटेक्शन हो सकता है खत्म
भारतीय कानून के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour Protection) की सुविधा मिलती है। इसका मतलब है कि किसी यूजर के पोस्ट के लिए कंपनी पर सीधा आपराधिक मुकदमा नहीं चलता।
हालांकि, सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि टेक कंपनियां भारतीय नियमों की लगातार अनदेखी करती हैं, तो यह कानूनी सुरक्षा उनसे वापस ली जा सकती है। सरकार ने दोहराया है कि भारतीय यूज़र्स की निजता, डेटा सुरक्षा और राष्ट्र की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
“डिजिटल दुनिया भले ही सीमाहीन हो, लेकिन भारत में काम करने के लिए देश के संविधान और आईटी नियमों की सीमा का सम्मान करना ही होगा।”