‘पाकिस्तान नहीं चीन है असली चुनौती, शांति चाहते हैं तो युद्ध के लिए तैयार रहें’: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे का बड़ा बयान!
DEFENCE | BY: POLITICS FEVER DESK | UPDATED: AUGUST 21, 2026
भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर बड़ा बयान दिया है। अपनी नई पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी पाकिस्तान नहीं, बल्कि चीन होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर देश स्थायी शांति चाहता है, तो उसे हमेशा किसी भी युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा
Highlights
- चीन मुख्य प्रतिस्पर्धी: जनरल नरवणे ने कहा कि आने वाले वर्षों में राजनीति, व्यापार, अर्थव्यवस्था और सैन्य स्तर पर चीन ही भारत का असली प्रतिस्पर्धी रहेगा।
- ‘शत्रु नहीं, प्रतिस्पर्धी’ शब्द का प्रयोग: उन्होंने जानबूझकर चीन के लिए ‘दुश्मन’ के बजाय ‘प्रतिस्पर्धी’ (Competitor) शब्द का इस्तेमाल किया और कूटनीतिक संवाद पर जोर दिया।
- पाकिस्तान से आतंकवाद का खतरा: उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के साथ आतंकवाद के निरंतर समर्थन के कारण ध्यान पश्चिमी सीमा पर रहता है, लेकिन दीर्घकालिक चुनौती चीन है।
- ‘शांति के लिए युद्ध की तैयारी’: पूर्व सेना प्रमुख ने पुरानी सामरिक उक्ति का हवाला देते हुए कहा कि शांति बनाए रखने का एकमात्र तरीका सैन्य रूप से मजबूत रहना है।
मुख्य समाचार
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने देश के सुरक्षा परिदृश्य को लेकर अहम सामरिक विश्लेषण पेश किया है। अपनी नई पुस्तक के विमोचन समारोह के दौरान उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों—पाकिस्तान और चीन-से मिलने वाली चुनौतियों का तुलनात्मक आकलन प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि दोनों ही देशों के साथ हमारी सीमाएं अनसुलझी हैं और दोनों के साथ भारत ने युद्ध लड़े हैं, लेकिन दोनों से मिलने वाले खतरे की प्रकृति बिल्कुल अलग है।
‘पाकिस्तान और चीन पूरी तरह अलग स्तर की चुनौतियां’
जनरल नरवणे ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से मिलने वाला तात्कालिक खतरा मुख्य रूप से सीमा पार आतंकवाद को उसके निरंतर समर्थन की वजह से है। हालांकि, लंबे समय के नजरिए से भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन की तरफ से आएगी।
1. बहुआयामी प्रतिस्पर्धा: चीन केवल सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, व्यापार, तकनीकी और आर्थिक क्षेत्रों में भी भारत का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी साबित होगा।
2. संवाद और कूटनीति पहली प्राथमिकता: उन्होंने कहा कि जहां प्रतिस्पर्धा होती है, वहां टकराव की आशंका रहती है। भारत को इन विवादों को बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से सुलझाने का प्रयास करना चाहिए।
3. सैन्य तैयारी जरूरी: बल प्रयोग हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए, लेकिन किसी भी दुस्साहस को रोकने के लिए देश की सैन्य शक्ति और तैयारी चाक-चौबंद रहनी चाहिए।
“यदि आप शांति चाहते हैं, तो आपको युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। चीन राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार और सैन्य मामलों में हमारा मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है। हमें अपनी शक्ति मजबूत रखनी होगी ताकि कोई हमारी सीमाओं पर आंख न उठा सके।”
– जनरल एम.एम. नरवणे (पूर्व थल सेना प्रमुख)