NEWS | BY: POLITICS FEVER DESK | UPDATED: AUGUST 10, 2026
उत्तर प्रदेश सरकार पशुपालक किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक नया प्लान लेकर आई है। बुलंदशहर के सफल ‘गौमूत्र और डेयरी FPO मॉडल’ को अब पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी है, जिससे गाय पालने वालों को दूध के साथ-साथ गौमूत्र से भी अतिरिक्त कमाई का जरिया मिलेगा।
Highlights
- अतिरिक्त कमाई का जरिया: किसानों को अब केवल दूध बेचने से ही नहीं, बल्कि गौमूत्र के कलेक्शन से भी सीधी आय होगी।
- बुलंदशहर मॉडल का विस्तार: बुलंदशहर में FPO (किसान उत्पादक संगठन) के सफल प्रयोग के बाद अब इसे प्रदेशव्यापी स्तर पर लागू किया जा रहा है।
- ऑर्गेनिक खेती और प्रॉडक्ट्स को बढ़ावा: संकलित गौमूत्र से जैविक खाद (Organic Fertilizer), कीटनाशक और औषधि निर्माण कर बाजार में बेचा जाएगा।
मुख्य समाचार
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प के तहत पशुपालकों के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। राज्य में गाय पालने वाले किसानों की कमाई बढ़ाने के उद्देश्य से अब FPO (Farmer Producer Organization) नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत दूध के साथ-साथ गौमूत्र का व्यावसायिक इस्तेमाल कर किसानों को सीधा आर्थिक लाभ पहुँचाया जाएगा।
बुलंदशहर जिले में गौमूत्र कलेक्शन और डेयरी FPO के मिले शानदार नतीजों के बाद, राज्य सरकार इस सफल मॉडल को अब पूरे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर शुरू करने की रणनीति बना रही है।
कैसे काम करेगा ‘गौमूत्र FPO मॉडल’?
इस योजना के तहत गांव-गांव में पशुपालक किसानों को FPO से जोड़ा जाएगा। FPO की गाड़ियां और सेंटर किसानों के घर या डेयरी फार्म से सीधे गौमूत्र और दूध का संकलन करेंगे।
किसानों से खरीदे गए गौमूत्र को प्रोसेसिंग यूनिट्स में भेजा जाएगा, जहाँ से ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए कीट नियंत्रक (Pesticides), जीवामृत, और अन्य औषधीय उत्पाद तैयार किए जाएँगे। इससे जहाँ एक तरफ पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पशुपालकों की जेब में सीधा पैसा आएगा।
“अब गाय केवल दूध देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसकी देखभाल करने वाले हर किसान के लिए कमाई का स्थायी जरिया बनेगी। FPO मॉडल से जुड़कर छोटे पशुपालक भी हर महीने बेहतर मुनाफा कमा सकेंगे।”
– कृषि एवं पशुपालन विशेषज्ञ, उत्तर प्रदेश
आवारा पशुओं की समस्या का भी समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसानों को गैर-दुधारू या बूढ़ी गायों से भी गौमूत्र के ज़रिए नियमित कमाई होने लगेगी, तो लोग पशुओं को सड़कों पर छोड़ना बंद करेंगे। इससे राज्य में आवारा पशुओं की समस्या से भी काफी हद तक राहत मिलेगी और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
बुलंदशहर में FPO का यह प्रयोग बेहद सफल रहा है। अब इसे प्रदेश स्तर पर लागू करने से न केवल पशुपालकों को दूध के साथ गौमूत्र से अतिरिक्त आय होगी, बल्कि प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती को भी नई दिशा मिलेगी।”
– कृषि एवं पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश