पुणे में छात्रों से संवाद के दौरान राहुल गांधी का मनुस्मृति पर तीखा प्रहार, महिलाओं के अधिकारों को लेकर उठाए गंभीर सवाल
- छात्र संवाद में बयान: पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने युवाओं के सवालों के जवाब दिए।
- ग्रंथों के संदर्भ पर टिप्पणी: उन्होंने मनुस्मृति के कुछ श्लोकों और संदर्भों का उल्लेख करते हुए महिलाओं की निर्भरता वाली सोच की आलोचना की।
- संवैधानिक समानता पर जोर: राहुल गांधी ने कहा कि आधुनिक भारत का आधार संविधान और हर नागरिक को मिलने वाले समान अधिकार होने चाहिए।
मुख्य समाचार: महाराष्ट्र के पुणे में छात्रों और युवाओं से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सामाजिक व्यवस्था और महिलाओं के अधिकारों पर अपनी बात रखी। उन्होंने प्राचीन ग्रंथों में उल्लिखित कुछ व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को किसी के अधीन देखने की सोच समाज की प्रगति में बाधक है।
कार्यक्रम के दौरान एक छात्र द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने ऐतिहासिक संदर्भों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के लोकतांत्रिक और आधुनिक दौर में देश को संविधान की बराबरी और स्वतंत्रता के मूल्यों के अनुसार आगे बढ़ना होगा।
संवाद के दौरान राहुल गांधी का दृष्टिकोण
राहुल गांधी ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि किसी भी समाज की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि वहां महिलाओं को कितने अवसर, स्वायत्तता और सम्मान मिलता है।
विचारधारा और संविधान: उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार और स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
रूढ़िवादिता पर सवाल: कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि पुराने दौर की ऐसी व्यवस्थाएं जो महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करती हैं, उन्हें आधुनिक समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक और वैचारिक बहस
धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रंथों की व्याख्या को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस देखने को मिलती रही है। राहुल गांधी के इस बयान के बाद एक बार फिर संविधान बनाम परंपरागत मान्यताओं को लेकर वैचारिक चर्चा तेज हो गई है।
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