DESK: POLITICS FEVER | UPDATED: SEPTEMBER 14, 2026
- कूटनीतिक बढ़त: नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स समिट से भारत को कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर अहम बढ़त मिली है।
- आतंकवाद की कड़ी निंदा: नई दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रूप से आवाज उठाई गई और वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर जोर दिया गया।
- रूस और चीन के साथ रिश्ते: समिट के दौरान भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत मिले हैं, जबकि रूस के साथ व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में संपन्न हुए बहुचर्चित BRICS समिट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है। इस सम्मेलन के दौरान पास किए गए ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में आतंकवाद की खुलकर निंदा की गई है, ग्लोबल साउथ (Global South) की मुखर आवाज को बुलंद किया गया है, और वैश्विक संस्थाओं में समय के अनुसार सुधार लाने की पुरजोर वकालत की गई है।
यह समिट भारत की कूटनीति के लिहाज से बेहद सफल साबित हुआ है, क्योंकि इससे देश को वैश्विक स्तर पर अपने रणनीतिक हितों को साधने में बड़ा मंच मिला है।
रूस और चीन के साथ रिश्तों पर बनी नई सहमति
समिट के दौरान द्विपक्षीय वार्ताओं और बैठकों में मुख्य रूप से इन अहम बिंदुओं पर सहमति बनी:
सम्मेलन के दौरान दोनों पड़ोसी देशों के आपसी रिश्तों में सुधार और तनाव कम होने के सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं।
पारंपरिक मित्र रूस के साथ व्यापारिक रिश्तों को विस्तार देने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र और रक्षा (Defense) सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत का बढ़ता कद
इस सफल ब्रिक्स समिट के आयोजन और इसके दूरगामी परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति दोनों मोर्चों पर अपनी अहम भूमिका निभाता रहेगा।