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वंदे मातरम विवाद पर शशि थरूर का बड़ा बयान, 1937 के कांग्रेस प्रस्ताव का हवाला देकर साफ किया पार्टी का रुख

August 22, 2026 2 Min Read
Comments Off on वंदे मातरम विवाद पर शशि थरूर का बड़ा बयान, 1937 के कांग्रेस प्रस्ताव का हवाला देकर साफ किया पार्टी का रुख

POLITICS | BY: POLITICS FEVER DESK | UPDATED: AUGUST 22, 2026

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी की ऐतिहासिक स्थिति स्पष्ट करते हुए 1937 के फैसले का हवाला दिया है।

HIGHLIGHTS
  • 1937 के प्रस्ताव का उल्लेख: थरूर ने कहा कि कांग्रेस 1937 में तय किए गए पहले दो छंदों (Stanzas) को गाने की परंपरा का पालन करती आ रही है।
  • बीजेपी के आरोपों का जवाब: वंदे मातरम के अनादर के दावों पर पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक अभियान करार दिया।
  • संवैधानिक मर्यादा: कांग्रेस नेताओं ने दोहराया कि पार्टी राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक फैसलों का पूरा सम्मान करती है।

मुख्य समाचार: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने पार्टी का पक्ष रखा है। बीजेपी द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद गाने की परिपाटी आज की नहीं, बल्कि आजादी से पहले के एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पर आधारित है।

शशि थरूर ने कहा कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने रवींद्रनाथ टैगोर और अन्य वरिष्ठ नेताओं की सलाह के बाद यह फैसला लिया था कि राष्ट्रीय गीत के पहले दो छंदों को आधिकारिक रूप से गाया जाएगा, क्योंकि इनमें भारत माता की प्राकृतिक सुंदरता और मातृभूमि के प्रति वंदना का वर्णन है।

1937 का ऐतिहासिक फैसला और कांग्रेस का रुख

थरूर के अनुसार, आजादी के आंदोलन के दौरान सभी वर्गों की भावनाओं और समावेशी राष्ट्रवाद को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था को सर्वसम्मति से अपनाया गया था।

परंपरा का पालन: कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि पार्टी उसी सर्वमान्य फैसले के तहत दशकों से अपने अधिवेशनों और कार्यक्रमों में इसे गाती आ रही है।

विवाद पर आपत्ति: उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह ऐतिहासिक संदर्भों को नजरअंदाज कर इसे बेवजह सियासी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।

सदन से सड़क तक बयानबाजी:
हाल ही में विभिन्न राज्यों के विधायी सदनों में राष्ट्रगान और वंदे मातरम के गायन को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक देखने को मिली है। बीजेपी ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता न दिखाने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में कांग्रेस ने इस पूरे मामले को तथ्यों के विपरीत बताया है।

राष्ट्रीय प्रतीकों पर सियासी टकराव

दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों, इतिहास और परंपराओं की व्याख्या को लेकर टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। जहां एक तरफ सत्तापक्ष इसे सीधे राष्ट्रवाद से जोड़ रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे चुनावी लाभ के लिए इतिहास को विकृत करने का प्रयास बता रहे हैं।

(देश, राजनीति और प्रशासनिक मामलों की सटीक व निष्पक्ष पड़ताल के लिए जुड़े रहें Politics Fever के साथ।)

Tags:

BJP vs CongressCongressNational Song ControversyShashi TharoorVande Mataram
Abhay Mishra
Author

Abhay Mishra

Abhay Mishra Politics Fever के संस्थापक एवं मुख्य संपादक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, प्रशासनिक नीतियों, समसामयिक घटनाक्रमों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं।

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